
लोग कहते हैं ज़मीं पर िकसी को खुदा नहीं मीलता
शायद उन लोगों को दोस्त कोई तुम-सा नहीं िमलता
िकस्मतवालों को ही िमलाती है पनाह कीसी के िदल में
यूं हर शख़्स को तो जन्नत का पता नहीं िमलता
अपने सायें से भी ज़यादा यकीं है मुझे तुम पर
अंधेरों में तुम तो mil जाते हो, साया नहीं िमलता
इस बेवफ़ा zindagi से शायद मुझे इतनी मोहब्बत ना होती
अगर इस ज़िंदगी में दोस्त कोई तुम जैसा नहीं
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