तेज़ी से पिघल रही है ग्रीनलैंड की बर्फ़


एक ताज़ा अध्ययन से पता चला है कि ग्रीनलैंड की बर्फ़ पिछले कुछ वर्षों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा रफ़्तार से पिछल रही है. ग्लेशियरों के पिघलने में इस तेज़ी को गंभीर चिंता के तौर पर देखा जा रहा है.अध्ययनकर्ताओं ने साइंस पत्रिका में अपने लेख के माध्यम से बताया है कि बर्फ़ के इस तेज़ी से पिघलने के कारण समुद्र का स्तर तेज़ी से उठ रहा है.समुद्र के स्तर में दर्ज हो रही बढ़ोत्तरी पिछले 7-8 वर्ष पहले तक समुद्री जलस्तर में वृद्धि की दर से कहीं अधिक है.

शोधकर्ताओं ने इसके पीछे दो अहम वजहें बताई हैं. एक तो है हवा के तापमान में दर्ज हो रही बढ़ोत्तरी. और दूसरा है ग्लेशियरों का तेज़ गति से समुद्र में पहुँचना.

दरअसल, तापमान बढ़ने के कारण बर्फ के पिघलने की रफ्तार तो बढ़ी ही है, साथ ही ग्लेशियर भी तेज़ी से समुद्र में पहुंच रहे हैं.इन ग्लेशियरों के साथ काफी बर्फ समुद्र में पहुँच जाती है और इससे भी समुद्र का स्तर ऊपर आता है.

शोधकर्ताओं ने चेताया है कि अगर आर्कटिक का तापमान और बढ़ता रहा तो बर्फ़ के पिघलने की रफ्तार और बढ़ सकती है. इससे समुद्र के स्तर में बढ़त जारी रहेगी जो कि चिंताजनक है.हालांकि उन्होंने बताया है कि फिलहाल ऐसा ख़तरा कम ही है कि ग्रीनलैंड का आइसकैप कहा जाने वाला हिमाच्छादन पूरी तरह से नष्ट होने की कगार पर है.

...और एक अच्छी ख़बर

जहाँ आर्कटिक से धरती के लिए ख़बर चिंताजनक मिल रही है वहीं अमेज़न के घने जंगलों से राहत की ख़बर भी मिल रही हैं. ब्राज़ील से ताज़ा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अमेज़न के जंगलों के ख़त्म होने या काटे जाने की दर घटकर आधी रह गई है. पिछले 20 वर्षों में रिकॉर्ड तेज़ी से खत्म हो रहे अमेज़न के जंगलों में पेड़ों को काटने की दर इतनी कम 20 बरस के दौरान कभी नहीं रही. हालांकि पर्यावरण विद इस ख़बर का स्वागत तो कर रहे हैं पर उनका कहना है कि आंकड़ा अभी भी जंगलों की कटाई पर पूरी तरह से रोक की बात से कहीं आगे हैं और वनों में कटाई की दर में कमी का कारण आर्थिक मंदी भी रहा है.

Comments

  1. kafi behatar or acha aricle post kiya hai apne ............ kafi logo ko to malum bhi nahi inke baare me but is article se kafi janakari milti hai un logo ko jo inse avgat nahi..

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