मुंबई पर आतंकी हमला करने वाले अजमल कसाब के आखिरी सफर का ब्योरा: २० नवंबर 2012 रात १ बजे : तीन गाडिय़ों का काफिला ऑर्थर रोड जेल से बाहर निकला। इसमें एक सफेद स्कोर्पियो भी थी। इसमें सात कमांडो भी मौजूद थे। काफिला पुणे के येरवदा जेल की ओर जा रहा था। सुबह ४ बजे : काफिला पुणे के येरवडा जेल पहुंचा। कसाब को अंडा सेल ले जाया गया। बाहर चार गार्ड लगाए गए। डॉक्टरों की टीम ने परीक्षण किया। महज पांच सौ मीटर की दूरी पर फांसी की तैयारी पूरी थी। सुबह होने पर : डॉक्टरों ने कसाब की फिर जांच की। वजन, ऊंचाई जैसे आंकड़े लिए। दिन में उसे नाश्ता और खाना भी दिया गया। इस बीच डॉक्टर उसके व्यवहार पर भी नजर जमाए हुए थे। शाम को : दाढ़ी और बाल काटे गए। फिर कसाब ने स्नान किया। रात को : जेल अधिकारी ने खाने को लेकर कसाब की पसंद पूछी। कसाब ने कहा, 'जो दोगे खा लूंगा।' उसे रोटी, दाल और चावल दिया गया। साथ में कढ़ी और प्याज। रात ९ बजे : कसाब सोने चला गया। बुधवार सुबह ४ बजे : गार्ड कसाब को उठाने अंडा सेल पहुंचे। उससे प्रार्थना करने के बारे म...
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झांसी की रानी का ऐतिहासिक पत्र
भारत में ब्रितानी शासन के ख़िलाफ़ हुए 1857 के विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की एक महत्वपूर्ण चिट्ठी लंदन में ब्रिटिश लाइब्रेरी के आर्काइव्स में मिली है. झांसी की रानी ने 1857 के विद्रोह से कुछ ही देर पहले यह पत्र ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जनरल लॉर्ड डल्हाऊसी को लिखा था. लंदन में आजकल विक्टोरिया एंड एल्बर्ट म्यूसियम की महाराजा प्रदर्शिनी की रिसर्च क्युरेटर दीपिका अहलावत ने इस पत्र के बारे में प्रकाश डाला है. दीपिका अहलावत का कहना है, "ये चिट्ठी उन दस्तावेज़ों का हिस्सा है जो बॉरिंग कलेशन के नाम से जाने जाते हैं. इन दस्तावेज़ों का नाम एक ब्रितानी अधिकारी - लेविन बेंथम बॉरिंग के नाम पर है जिन्होंने भारत के राजाओं-महाराजाओं के बारे में दस्तावेज़, तस्वीरें और अन्य चीज़े एकत्र की थीं." झांसी की रानी के इस पत्र में उस रात का विवरण है जब उनके पति की मृत्यु हुई थी. लक्ष्मीबाई ने पत्र में लिखा है कि डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स के डर से उनके पति ने विधिवत ढंग से पुत्र को गोद लिया था ताकि उसे झांसी का अगला राजा स्वीकार किया जाए लेकिन लॉर्ड डल्हाऊसी ने इसे...
मशहूर टीवी जर्नलिस्ट बरखा दत्त भी यौन शोषण का शिकार हुईं थीं बरखा ने 02 Dec 15 बुधवार को लॉन्च हुई अपनी किताब ‘This Unquiet Land - Stories from India's Fault Lines’ में इसका जिक्र किया है। - बरखा लिखती हैं- “ मैं 10 साल की भी नहीं थी , जब पहली बार मेरा यौन शोषण हुआ। यौन शोषण करने वाला कोई और नहीं बल्कि दूर के एक रिश्तेदार थे। वे कुछ वक्त के लिए हमारे घर रहने आए थे। दूसरे पंजाबी घरों की तरह मेरे घर के दरवाजे भी रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए खुले रहते थे। आज मैं उस रिश्तेदार के अपनी फैमिली के साथ रिश्तों को याद नहीं कर पाती। लेकिन एक बच्चे की नजर में वह दूर का प्यारा चाचा या मामा था। मुझे लगता था कि मैं अपने घर में सेफ हूं। ” - “ केवल यह सोच पाती हूं कि एक ऐसा आदमी जिसकी पीठ पर बैठकर आप खुले में खेलते हों , क्या वह राक्षस साबित हो सकता है ? बचपन में हम समझ नहीं पाते कि हमारे साथ क्या हो रहा है। लेकिन मैं उस चेहरे के पीछे छिपे दरिंदे और उसकी गंदगी को नहीं पहचान पाई। हम आज भी अपने बच्चों को ‘ गुड और बैड टच ’ के बारे में ज्यादा समझा नहीं पाए हैं। शुरुआत में कुछ मौकों के बाद मैं...
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