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Showing posts from May 20, 2009

मेरी ही बातें बताता है कोई

बंद आखों में सपने सजाता है कोई , मेरे लिए भी मुस्कराता है कोई , जब नही होता हूँ में पास में , मेरी ही बातें बताता है कोई , होती है रात ,निकलता है चाँद चाँद को तब मुझसा बताता है कोई , जब कही छेड़ती है सरगम कोई कोयल , तब मेरे इन गीतों को गुनगुनाता है कोई साभार

चमन ,दिया ,बेबफ़ा

हरे भरे चमन को किसने उजाड़ डाला मेरे दर्दे ग़म को किसने उखाड़ डाला , ये किसकी आहट से ,खामोशी छा गई ये कौन आया बहार में वीरानी आ गई , बहुत चाहा था जले इस गुलशन में दिया पर ऐसी चली हवा कि दीपक बुझा गई प्यार करना चाहा था हमने भी दोस्तों पर एक बेबफ़ा की याद ,हमको आ गई साभार

क्षण भर को क्यों प्यार किया था

अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर, पलक संपुटों में मदिरा भर, तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया था? क्षण भर को क्यों प्यार किया था? ‘यह अधिकार कहाँ से लाया!’ और न कुछ मैं कहने पाया -मेरे अधरों पर निज अधरों का तुमने रख भार दिया था! क्षण भर को क्यों प्यार किया था? वह क्षण अमर हुआ जीवन में, आज राग जो उठता मन में - यह प्रतिध्वनि उसकी जो उर में तुमने भर उद्गार दिया था! क्षण भर को क्यों प्यार किया था? साभार