मेरी ही बातें बताता है कोई
बंद आखों में सपने सजाता है कोई , मेरे लिए भी मुस्कराता है कोई , जब नही होता हूँ में पास में , मेरी ही बातें बताता है कोई , होती है रात ,निकलता है चाँद चाँद को तब मुझसा बताता है कोई , जब कही छेड़ती है सरगम कोई कोयल , तब मेरे इन गीतों को गुनगुनाता है कोई साभार