झील सी अपनी आँखों में डूब जाने दो मुझे जिस्म जलता है बहुत दो पल नहाने दो मुझेझील सी अपनी आँखों में डूब जाने दो मुझे। हस्ती से बेजारी न थी मौत से यारी न थीउन राहों पर चल दिए जिसकी तैयारी न थी। फासला तो है मगर अब कोई फासला नहीं हैतुम मुझसे जुदा सही मगर दिल से जुदा नहीं। आओ मै और तुम मिलकर चिरागेदिल जलायेकल कैसी हवा चले यह कोई जानता ही नहीं
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