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Showing posts from May 27, 2009
झील सी अपनी आँखों में डूब जाने दो मुझे जिस्म जलता है बहुत दो पल नहाने दो मुझेझील सी अपनी आँखों में डूब जाने दो मुझे। हस्ती से बेजारी न थी मौत से यारी न थीउन राहों पर चल दिए जिसकी तैयारी न थी। फासला तो है मगर अब कोई फासला नहीं हैतुम मुझसे जुदा सही मगर दिल से जुदा नहीं। आओ मै और तुम मिलकर चिरागेदिल जलायेकल कैसी हवा चले यह कोई जानता ही नहीं