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Showing posts from June 16, 2009

दलेर मेहंदी का सफरनामा: सिंह इज किंग

जन्म से पहले ही संगीत से जुड़े दलेर मेहंदी ने अमेरिका में टैक्सी भी चलाई है और भारत में डेढ़ सौ रुपए में स्टेज शो भी किए हैं। दलेर ने करोड़ों कमाए, समाज के लिए ख़र्च भी किए। उन्हें ख़ूब शोहरत मिली, तो उन पर ‘कबूतरबाज़ी’ के आरोप भी लगे। ‘सिंह इज़ किंग’ टाइटल के पहले हक़दार बने दलेर सुना रहे हैं अपना दिलचस्प सफ़रनामा.. मेरा जन्म 18 अगस्त, 1967 को अविभाजित बिहार में हुआ। जब मैं गर्भ में था, मेरी मां बलबीर कौर संगीत सीख रही थीं। डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी, पर उस्ताद बुलाकी बाबू ने रियाज जारी रखने का सुझाव दिया। दरअसल, उस्ताद जी का मानना था कि यही सही व़क्त है, जब वे संगीत साधना करेंगी, तो उसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे यानी मेरे ऊपर पड़ेगा। इसीलिए मैं कहता हूं कि मेरी सफलता में मेरे माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान है। मैं जब पैदा नहीं हुआ था, तभी उन्होंने मेरा नाम दलेर सिंह रखने का फैसला कर लिया था। मेरी उम्र तब पांच साल रही होगी, जब पिताजी अजमेर सिंह चंदन ने मुझे कुछ शब्द सिखाए थे- ‘मेरे लाल जियो, तेरा अंत न जाणा..’। उस वक्त हम धनबाद में रहते थे, जहां एक गुरुद्वारा था। हर शनिवार-इतवार ...