दुनियाभर में वर्ष 2009 के दौरान समाचार संकलन का कार्य करते हुए करीब सौ पत्नकारों और मीडियाकर्मियों की जानें चली गईं। कनाडा में पत्नकारों के संगठन कैनेडियन जर्नलिस्ट फार फ्री एक्सप्रेशन ने कल यहां जारी एक बयान में कहा कि पूरी दुनिया के हालात पत्नकारों के लिए बेहतर होने क ी बजाय और बदतर होते जा रहे हैं। वर्ष 2008 के दौरान विश्व के विभिन्न क्षेत्नों में रिपोर्टिंग के दौरान जहां मारे गए पत्नकारों की संख्या ८७ थी वह इस वर्ष बढकर सौ हो गई।

इसमें हैरान कर देने वाली बात यह है कि वर्ष 2009 में मारे गए सौ पत्नकारों में से अकेले 31 नवम्बर 2009 में फिलीपींस में 100 हमलावरों द्वारा किए गए हमले में मारे गए। इस हमले में 31 पत्नकारों के अलावा 26 अन्य भी मारे गए थे। इस हमले का उद्देश्य केवल एक प्रत्याशी को गवर्नर पद के लिए होने वाले चुनाव में हिस्सा लेने से रोकना था।
कनाडाई जर्नलिस्ट ग्रुप के अध्यक्ष अनरेल्ड अंबर ने कहा कि जब भी किसी पत्नकार की हत्या का मामला सामने आता है तो उसके पीछे जो वजह निकलकर आती है वह यह होती है कि उन सभी पत्नकारों की जान केवल इसलिए गई क्योंकि वे किसी भ्रष्ट अधिकारी अथवा राजनीतिज्ञ के खिलाफ कोई अन्वेषणात्मक रिपोर्ट तैयार करने में लगे हुए थे १लेकिन फिलीपींस वाले मामले में सभी पत्नकार उस समय मारे गए जब वे एक संवाददाता सम्मेलन में बैठे हुए थे।
उन्होंने कहा हैरान करने वाली बात यह है कि इस वर्ष मारे गए कुल पत्नकारों में से 70 फीसदी पत्नकार विश्व के पांच देशों फिलीपींस.मेक्सिको.सोमालिया.पाकिस्तान और रूस में मारे गए। उन्होंने कहा .किसी भी देश में ऐसा मामला बहुत कम ही सामने आता है कि जब किसी हत्यारे को पत्नकार की हत्या करने के लिए जेल की सजा सुनायी जाती हो। हमने यह उम्मीद जतायी थी कि इस वर्ष पूरे विश्व में मारे जाने वाले पत्नकारों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहेगी। ऐसा इसलिए था क्योंकि वर्ष 2007 में 102 पत्नकारों के मारे जाने के बाद वर्ष 2008 में मारे जाने वाले पत्नकारों की संख्या में कमी आयी थी और यह 87 हो गई थी। ( भास्कर)

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