यूँ तो सात दशकों तक चले उनके राजनैतिक करियर में ज्योति बसु को कई उपलब्धियों के लिए याद किया जाएगा, लेकिन शायद उनका सबसे बड़ा योगदान था- कम्युनिस्ट आंदोलन को 'ये आज़ादी झूठी है' के दिनों से निकालकर संसदीय व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका में विराजमान करा पाना. कई मौक़ों पर ज्योति बसु ने किंग मेकर की भूमिका निभाई, लेकिन जब किंग बनने का मौक़ा आया, तो वे अपनी पार्टी के कहने पर पीछे हट गए. वर्ष 1996 में वो उस जगह पर पहुँच सकते थे, जहाँ आज तक कोई भी भारतीय कम्युनिस्ट नहीं पहुँच पाया है. लेकिन पार्टी ने युवा तुर्क प्रकाश कराट और सीताराम येचुरी के दबाव के चलते इसका ये कहते हुए विरोध किया कि पार्टी को उस दिन का इंतज़ार करना चाहिए, जब उनके पास सरकार चलाने के लिए अपना पूरा बहुमत हो. भूल ज्योति बसु ने पार्टी के इस फ़ैसले को सिर आँखों पर लिया और बाद में जब धूल थोड़ी छँटी तो उन्होंने ये ज़रूर कहा कि ये पार्टी की ऐतिहासिक भूल थी. ज्योति बसु ज्योति बसु 23 साल तक मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु सोमनाथ लाहिरी, नंबूदरीपाद और बीटी रणदिवे के टक्कर के वक्ता नहीं थे लेकिन उनमें अपने अपूर्ण वाक्...
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आया बसंत
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बसंत पंचमी से उज्जैन में होली शुरू होने की परंपरा है। सबसे पहले राजाधिराज महाकाल को गुलाल लगाई जाती है। इसके बाद नगर में होली उत्सवों की शुरुआत होती है। बसंत पंचमी पर महाकाल मंदिर में सुबह चार बजे होने वाली भस्मारती में अभिषेक-पूजन होगा। इसके पश्चात पुजारी श्रंगार करेंगे और बाबा को बसंत अर्पित कर गुलाल लगाएंगे। ढाबारोड स्थित श्रीनाथजी की हवेली में भी होली उत्सव शुरू हो जाएगा। ट्रस्टी विजय गुप्ता ने बताया बसंत पंचमी से सभी पुष्टिमार्गीय वैष्णव मंदिरों में चालीस दिवसीय होली उत्सव की शुरुआत होगी। सुबह ११.३क् बजे होने वाले राजभोग दर्शन के बाद ठाकुरजी के साथ अबीर-गुलाल से होली खेलेंगे। कार्तिकचौक स्थित गोवर्धननाथजी, गोलामंडी स्थित पुरुषोत्तमजी, सराफा स्थित मदनमोहनजी व मंगलनाथ मार्ग स्थित महाप्रभुजी की बैठक में चालीस दिन तक होली उत्सव मनेगा। प्रतिदिन आरती के दौरान रंग-गुलाल उड़ेगा। जैसे-जैसे होली पर्व नजदीक आएगा रंग बढ़ते जाएंगे और ठाकुरजी के तरह-तरह के श्रंगार होंगे।