मोहनिया...मोहनदास...महात्मा गांधी
गांधीजी पर बेहद चर्चित और प्रशंसित उपन्यास पहला गिरमिटिया के लेखक गिरिराज किशोर ने उनका विश्लेषण करते हुए लिखा है - महात्मा गाँधी के जीवन के तीन पक्ष हैं-एक ‘मोहनिया पक्ष’, दूसरा ‘मोहनदास पक्ष’, तीसरा ‘महात्मा गाँधी पक्ष’। हर आदमी के जीवन में ऐसा विभाजन होता है। परन्तु किसी भी महान् व्यक्ति के जीवन के विकास के सन्दर्भ में ये पक्ष महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। कृष्ण के जीवन में भी इसी तरह कान्हा या गोपाल पक्ष, कृष्ण पक्ष, योगिराज कृष्ण पक्ष थे। बैरिस्टरी से लेकर दक्षिण अफ़्रीका से लौटने तक उनका मोहनदास रूप है या गाँधी भाई रूप। बीच-बीच में उनका मोहनिया रूप भी आता रहता है। कभी शेख़ मेहताब के माध्यम से, कभी कस्तूर के माध्यम से, कभी बा और बापू के माध्यम से और कभी उनकी याद के जरिए...गांधीजी को हम जिस भी रूप में देखना चाहें, वह उस रूप में सबसे अलग और प्रभावी दिखते हैं। यही वजह है कि वह अमेरिकी राष्ट्रेपति बराक ओबामा के भी आदर्श हैं और चीन जैसा भारत का पड़ोसी भी उन्हें अपने यहां सम्माचन देता है। यहां बता दें कि बीजिंग में महात्मा गांधी ही इकलौते भारतीय नेता हैं, जिनकी प्रतिमा सार्वजनिक स्थतल प...