कहानी कश्मीर की / 1932 से अब तक कश्मीर की पूरी कहानी
इसे दैनिक भास्कर के स्टेट एडिटर श्री नवनीत गुर्जर जी से लिखा है और भास्कर डॉट पर प्रकाशित है. कश्मीर देश के लिए एक दुखती रग रहा और आज भी बना हुआ है? कौन इसके लिए, किस हद तक जिम्मेदार है? किसने, किस हद तक इस मसले पर क्या- क्या कोशिशें कीं? सरदार पटेल के सचिव वीशंकर की किताब ‘सरदार पटेल का चुना हुआ पत्र व्यवहार’ के आधार पर... नेहरू जी के भावुकतापूर्ण अविवेक से नाराज़ थे सरदार पटेल महाराजा हरिसिंह के शासनकाल में जम्मू- कश्मीर का प्रशासन ठीक था। पहले पॉलिटिकल डिपार्टमेंट द्वारा चुने गए अधिकारियों के मातहत और बाद में गोपाल स्वामी अय्यंगार, महाराज सिंह और बीएन राव जैसे सुयोग्य भारतीय प्रशासकों के कारण। हालांकि, महाराजा खुद भी कार्यक्षम और परिश्रमशील शासक थे, परंतु उनके चरित्र में अनिर्णय अथवा असमंजस का भारी दोष था। 1932 में शेख अब्दुल्ला ने जो लोकप्रिय आंदोलन चलाया, उसके कारण शासन को उदार बनाने का पहला कदम उठाया गया। शुरुआत में यह कौमी आंदोलन था, जो मुसलमानों के हित की लड़ाई लड़ने के लिए खड़ा किया गया था।1939 में आंदोलन का कौमी स्वरूप खत्म कर दिया गया और पहले कश्मीर मुस्ल...