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Showing posts from August 8, 2010

इंदिरा गांधी पर भी फेंका गया था जूता

आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि 1969 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दरमियान ऊंझा सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार शंकरलाल के प्रचार के संबंध में चुनावी सभा को संबोधित कर रहीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भी जूता फेंका गया था। साल 2008 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के उपर बगदाद में जूता फेंका गया था, फिर चीन के प्रधानमंत्री पर लंदन के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में जूता फेंकने और इसके बाद भारत में सुप्रीम कोर्ट के जज भी अपने आपको जूते से नहीं बचा सके और भारत के गृहमंत्री पर भी एक पत्रकार द्वारा जूता फेंकने की घटना राजनीतिक महकमें में तहलका चुकी है। लेकिन जूता फेंकने की परम्परा आज की नहीं बल्कि भारत में तो बहुत पुरानी है। वर्ष 1969 में ऊंझा सीट पर जनसंघ के उम्मीदवार कांतिभाई डॉक्टर के खिलाफ कांग्रेसी उम्मीदवार शंकरलाल गुप्त खड़े हुए थे। जिनका प्रचार करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ऊंझा में एक सभा को संबोधित कर रही थीं उस दरमियान उन जूता फेंका गया जिसके बाद भारी हंगामा मचा इसके बाद इंदिरा गांधी ने लोगों से कहा था कि आप चाहे जूता फेंके या पत्थर मारें हम अपनी बात कहे बि...

ज़रदारी पर जूते

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के दिन आजकल ख़राब चल रहे हैं। जी हां ब्रिटेन दौरे से पहले ही आतंकवाद पर खरीखोटी सुन चुके ज़रदारी पर एक युवक ने जूते फेंक उनकी ब्रिटेन यात्रा का विरोध किया है। गौरतलब है कि कैमरन के भारत दौरे के बाद दिए गए बयान पर उखड़े पाक राष्ट्रपति ने ब्रिटेन न जाने का पूरा मन बना लिया था लेकिन ऐन मौके पर वे अपने आपको ब्रिटेन जाने से रोक नहीं पाए, जिसकी सजा उन्हें भरी सभा में अपमानित होना पड़ा। खबर है कि ज़रदारी पर बर्मिंघम में चल रही एक सार्वजनिक सभा के दौरान जूते फेंके गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार जरदारी बर्मिघम में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे इस दौरान ज़रदारी पर जूता फेंका गया। बहरहाल ज़रदारी की किस्मत अच्छी थी कि इस युवक द्वारा फेंका गया जूता उन्हें नहीं लगा। पुलिस ने जूता फेंकने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस छानबीन कर रही है। --------------------------------------------------- कब-कब और क्यूं चले जूते जूता लगे या न लगे लेकिन इसकी मार पड़ती ही है। सभ्य समाज में जूता फेंकने को कभी भी जायज नहीं ठहराया जा ...