मेरी ही बातें बताता है कोई
बंद आखों में सपने सजाता है कोई ,
मेरे लिए भी मुस्कराता है कोई ,
जब नही होता हूँ में पास में ,
मेरी ही बातें बताता है कोई ,
होती है रात ,निकलता है चाँद
चाँद को तब मुझसा बताता है कोई ,
जब कही छेड़ती है सरगम कोई कोयल ,
तब मेरे इन गीतों को गुनगुनाता है कोई
साभार
मेरे लिए भी मुस्कराता है कोई ,
जब नही होता हूँ में पास में ,
मेरी ही बातें बताता है कोई ,
होती है रात ,निकलता है चाँद
चाँद को तब मुझसा बताता है कोई ,
जब कही छेड़ती है सरगम कोई कोयल ,
तब मेरे इन गीतों को गुनगुनाता है कोई
साभार
खूबसूरत कविता लिखी है आपने । धन्यवाद ।
ReplyDeleteGood poem ,Neeraj,Please keep writing.
ReplyDeleteMy best wishes.
Dr.Bhoopendra
बहुत खूब।
ReplyDeleteजब दिल्लगी होती है तन्हाईयों से मेरी।
अपना ही गीत मुझको सुनाता है कोई।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
narayan narayan
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