मेरी ही बातें बताता है कोई

बंद आखों में सपने सजाता है कोई ,
मेरे लिए भी मुस्कराता है कोई ,
जब नही होता हूँ में पास में ,
मेरी ही बातें बताता है कोई ,
होती है रात ,निकलता है चाँद
चाँद को तब मुझसा बताता है कोई ,
जब कही छेड़ती है सरगम कोई कोयल ,
तब मेरे इन गीतों को गुनगुनाता है कोई
साभार

Comments

  1. खूबसूरत कविता लिखी है आपने । धन्यवाद ।

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  2. बहुत खूब।

    जब दिल्लगी होती है तन्हाईयों से मेरी।
    अपना ही गीत मुझको सुनाता है कोई।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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